Saturday, 14 July 2018

हालात-ए-दिल

आसमान को सागर भिगोते देखा,
आज मैंने बादल को रोते देखा।

कैसे मिल जाते हैं दो लोग अजनबी,
हमने तो अपनी क़िस्मत को हमेशा सोते देखा।

कितनी आसानी से लोग दिल से उतार देते हैं,
हमने खुद को ये बोझ हमेशा ढ़ोते देखा।

कौन है वो जो दिल में नफ़रत भरते हैं,
हमने तो सिर्फ़ प्यार को बोते देखा।

ढूंढ़ लेते हैं लोग जीने की आरज़ू,
हमने ख़ुद में से ख़ुद को खोते देखा।।

Wednesday, 11 July 2018

एक लड़की है

तेरे आग़ोश में अब मैं पिघलने लगा हूँ,
मत रोक मुझे, अब मैं संभलने लगा हूँ।

सिकुड़े रहते थे जो होंठ कभी, अब हँसते हैं,
तेरी मोहब्बत में अब मैं बदलने लगा हूँ।

बड़े ही ग़फ़लत से दिल को तक़सीम किये बैठे थे,
तेरी बदमस्त आदाओं के चलते अब मैं ढ़लने लगा हूँ।

मेरी आँखों में रूह कहीं ठंडी पड़ चुकी थी,
तेरे देखने से अब मैं जलने लगा हूँ।

जहाँ रुका हुआ था जहाँ सारा,
ख़ुद की उँगली पकड़ अब मैं चलने लगा हूँ।।

Sunday, 20 May 2018

अधूरा मैं

पता नही क्यों वो समझते हैं कि मुझे कोई कमी नही है,
कि मेरी आँखों में नमी नही है।
पता नही क्यों उन्हें लगता है कि मैं बहुत समझदार हूँ,
हर दुख हर ग़म से बे-असरदार हूँ।

मगर कभी देख सको तो इन आँखों के नीचे
काले निशानों को देखना,
अगर कभी देख सको तो उन आँखों में सूख चुके
अरमानों को देखना।
कभी सुन सको तो मेरी खामोशी की चीख़ों को सुनना,
कभी छू सको तो उन तरसते एहसासों को छूना।

तब कहीं शायद तुम मुझे देख सकोगी,
तब कहीं शायद तुम मुझे समझ सकोगी।
तब कहीं शायद तुम समझोगी मैं क्यों बरसता हूँ,
तब कहीं शायद तुम समझोगी मैं क्यों तरसता हूँ।

मैं तरसता हूँ उस मुस्कुराहट के लिए
जिसकी वजह मैं हूँ,
मैं तरसता हूँ उस परेशानी के लिए
जो मेरे लिए हो।
मैं तरसता हूँ उस ज़िद के लिए,
जो कोई मुझसे करे,
मैं तरसता हूँ उस लड़ाई के लिए
जो कोई मुझसे मेरे लिए लड़े।

अपना भी एक सपना है कि कभी
मैं भी किसी के सपने से गुज़रूँ,
कभी कोई ऐसा भी हो कि जिसे
मेरे हाथ की गरमाहट से आराम मिल जाये।

मैं तरसता हूँ किसी ऐसे के लिए
जिसके लिए मैं ज़रूरी हूँ,
मैं तरसता हूँ किसी के लिए
जिसका मन सिर्फ़ मेरे सामने खुले।
मैं तरसता हूँ किसी के लिए
जो मुझे अपनी तन्हाई का साथी माने,
मैं तरसता हूँ किसी ऐसे के लिए
जो मुझसे सब हाल खोल के रख दे।
मैं तरसता हूँ किसी ऐसे के लिए
जिससे ज़िन्दगी का भी कोई पर्दा न हो।।

Friday, 4 May 2018

कैसे

दिल मे जो दफ़्न है वो बताऊँ कैसे,
जो न बताऊँ तो फिर छुपाऊँ कैसे।।

जो अल्फ़ाज़ अभी तक समझा नही पाए,
उस प्यार को तुम्हें जताऊँ कैसे।

जिस ख़्याल का तुम्हारे ख़्याल पर पहरा है,
उस पहरे को ख़्याल से हटाऊँ कैसे।

न जाने कैसी पशोपेश में तुमने उलझा रखा है,
तुम्हें जीतने के लिए तुम्हें हराऊँ कैसे।

तुमने तो कह दिया तुम्हें भूल जाना अच्छा है,
ख़ुद को पाने के लिए तुम्हें गवाऊँ कैसे।।

Sunday, 8 April 2018

मेरे पहले अशआर

कई फ़ासले तय किये कई फ़सीलें पार हुए,
तब कहीं जाके उनके दीदार हुए।।

ऐसा भी नही की यूँ ही मिल गए वो,
बहुत मशक्क़त के बाद ही ये आसार हुए।

मुश्किलें और भी रहीं उनको मनाने के बाद,
ऐसे ही नही हम घोडी पर सवार हुए।

वो भूल करते हैं जो इश्क़ को खेल समझते हैं,
यहाँ रातों को दिग्गज भी बेदार हुए।

मामूल सी ख़्वाहिशें लिए जो जी रहे थे अब तक,
वो भी आजकल चाँद के तलबगार हुए।

खूबसूरत कोहसार भी देखे ख़ुदा के शाहकार भी देखे,
मगर तुम हो पहले अशआर मेरे जिसमें से ये नग्में हज़ार हुए।।

Monday, 19 March 2018

तुम और मैं

जब भी वो मुझे देखती है तो ऐसा लगता है,
जैसे रात देखती है चाँद को,
जैसे भँवरा देखता है फूल को,
जैसे मछली देखती है पानी को,
जैसे तुम देखती हो मुझे।

जब भी तुम मुस्कुराती हो मुझे देखकर तो ऐसा लगता है,
जैसे धरती मुस्कराती है बादल देखकर,
जैसे बच्चे मुस्कुराते है बारिश देखकर,
जैसे पंछी मुस्कुराते है हवा देखकर,
जैसे तुम मुस्कुराती हो मुझे देखकर।

जब तुम्हारा हाथ मेरे हाथ को छूता है तो ऐसा लगता है,
जैसे ओस ने छू लिया हो पत्तों को,
जैसे पानी ने छू लिया हो किनारों को,
जैसे छाँव ने छू लिया हो किरणों को,
जैसे तुम्हारे हाथ ने छू लिया हो मेरे हाथ को।

जब भी तुम मेरा इंतेज़ार करती हो तो ऐसा लगता है,
जैसे हरियल इंतेज़ार करता है पहली बारिश का,
जैसे अंकुर इंतेज़ार करता है थोड़ी सी नमी का,
जैसे सूरज इंतेज़ार करता है सुबह का,
जैसे तुम इंतेज़ार करती हो मेरा।

और जब तुम मुझे इतना प्यार करती हो तो ऐसा लगता है
जैसे रोशनी करती है जीवन से,
जैसे दिल करता है धड़कनों से,
जैसे आँसू करते है आँखों से,
जैसे तुम करती हो मुझसे।।

Tuesday, 13 February 2018

रात

उस दिन जब रात मेरे कमरे में आई थी,
मुझे याद है मेरे कानों में कुछ गुनगुनाई थी।।

कहीं दूर किसी के दिल में कुछ तो ज़रूर हुआ था,
यूँ ही नही वो हवा मुझसे शरमाई थी।।

जम चुकी थी जो चादर जज़्बातों की इस दिल पर,
देख तेरी साँसों की गरमाहट से कैसे नरमाई थी।।

मुझे याद है जब ज़ोर से मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा था,
ख़ुदा कसम उस रात तुम बहुत घबराई थी।।

तुम्हारी यादें जो लेके आई थी ये हवा,
अब समझता हूँ क्यों वो इतराई थी।।