Sunday, 19 March 2017

आकर्षण

मैं आकर्षित हूँ तुम्हारी तरफ,
तुमसे बोलना चाहती हूँ,
तुम्हे छूना चाहती हूँ,
तुम्हारे साथ हँसना चाहती हूँ,
संग तुम्हारे रोना चाहती हूँ,
हाँ मैं आकर्षित हूँ तुम्हारी तरफ।।

ऐसा नहीं कोई आया नही,
साथ ख्वाहिशें लाया नही।
सभी मुझसे मिलना चाहते है,
सभी मुझे छूना चाहते है।
मुझसे प्यार भी करते है,
ऐसा तो सभी कहते है।
मैं खुश हो जाती हूँ,
और करीब आ जाती हूँ,
मैं तुम्हारी तरफ आकर्षित हो जाती हूँ।

पर अब कुछ ठीक नही लग रहा,
कुछ अजीब है,
मैं तो पिता की तरह तुम्हे चाह रही थी,
मन ही मन तुम्हे और पा रही थी।
तुम्हे भाई कह कर हाथ पकड़ रही थी,
तुम्हे अपना समझ कर बहुत अकड़ रही थी।
मैं पत्नी बन तुम्हें पति मान रही थी,
तुम्हारी जीवन संगिनी से खुद को पहचान रही थी।

पर करीब आकर देखा तो,
तुम्हारी आँखों में कुछ और भाव था।
वो स्नेह वो ख़ुशी मिटने लगी थी,
लोलुपता और वासना अचानक से दिखने लगी थी।

एक अजीब स्तिथी में आ चुकी थी,
अपने आप में से कहीं जा चुकी थी।
मेरा इंकार मुझे तन्हा सरेआम करता है,
मेरा इकरार मुझे यहाँ बदनाम करता है।।

क्या इसमें मेरी ग़लती है,
तुममें वासना की अग्नि जलती है।
क्या इसमें दोष मेरा है,
तुम्हे जड़ मानसिकता ने घेरा है।

तुममें तो मुझे हर रिश्ता दिखाई देता है,
पर मुझमे सिर्फ तुम्हे वही दिखाई देता है।
जवाब दो मैं इंतज़ार करती हूँ,
विनम्र आग्रह फिर एक बार करती हूँ।
हाँ मैं आकर्षित हूँ तुम्हारी तरफ,
तुमसे पूछना चाहती हूँ,
तुम्हे प्यार करना चाहती हूँ।।

Monday, 16 January 2017

मेरी छोटी बहन

अब तक घर में छोटा था,
तो सबके सर चढ़ जाता था।
लाख मनाले चाहे कोई,
अड़ता तो अड़ जाता था।।

तभी किवाड़ पे दस्तक देती,
एक  छोटी सी अनजानी सी।
दादी बोली राजा बेटा,
तेरी इतनी सी लड़क कहानी थी।।
अब छोटा कोई और भी आया,
तुझे बड़ा बनाने को।
नन्हे तूफ़ान कैसे संभाले,
बस इतना तुझे समझाने को।।

देख उदास मुझे माँ बोली,
ये बहन होती है बड़ी ही भोली।
ऊपर से ये तो छोटी है,
तुझसे भी ज्यादा खोटी है।।
ये दुनिया बहुत अनजानी है,
ये बात तुझे ही समझानी है।
हाथ पकड़ अब चलना सीख,
बड़ा होगया अब ढलना सीख।।

छोटा था जब तक जीना,
राजा जैसा लगता है।
पर अब जाके पता चला कि,
बड़ा भाई होना कैसा लगता है।।

happy bdayyy. god bless..

पापा की बेटी

मैं अपने पापा की बेटी,
अकेले होने से डरती हूँ।
आपको बहुत याद करती हूँ,
पापा आपसे बहुत प्यार करती हूँ।।

क्या आपको याद है क्या,
मेरे मन की वो बात है क्या?
दीदी लाड़ली बन मुझे छुटकी बुलाती थी,
मैं मुँह बना के आपके पास आती थी।
प्यार से आप मुझे गोद में उठाते थे,
मुझे राजकुमारी बोल सवारी बन जाते थे।
आपकी पीठ पर बैठ मैं राजकुमारी लगती हूँ,
आपको आज भी हमेशा याद करती हूँ।
पापा आपसे बहुत प्यार करती हूँ।।

उन बचपन की आँख मिचोली में,
आप हमेशा कही छुप जाते थे।
जब न मिलने पर मैं रोती, तो
दरवाज़े की आड़ से देख मुस्कुराते थे।

अब मैं बड़ी हो चुकी हूँ,
अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हूँ।
अब मैं आपका सम्मान बन सकती हूँ,
आपकी नई पहचान बन सकती हूँ।

पर आप फिरसे वही खेल पुराना खेल गए,
मैं फिरसे खड़ी रो रही हूँ।
कि शायद किसी दरवाज़े की आड़ से,
मुझे देख मुस्कुरा रहे हो।
चुपके से मेरे पास आ रहे हो।।

पर अब मैं मज़बूत हिम्मत वाली बन गई हूँ,
आपकी लाड़ली से आपकी बेटी बन गई हूँ।
पर आपके बिना आज भी,
मैं कभी कभी डरती हूँ।
आपको बहुत याद करती हूँ,
पापा आप से बहुत प्यार करती हूँ।।

Saturday, 1 October 2016

दुल्हन

अरमानों का जोड़ा पहने, संस्कारों की चुनरी ओढे,
अब विदा हो चली है।
मेरी बहन आज दुल्हन बनी है।।

फेरों के बाद दुकड़िये मेँ इंतज़ार कर रही है,
पड़ोस की चाची दूर की बुआ सब प्यार कर रही है।
एकटक देखे माँ किवाड़ पर खड़ी है,
सोचती है बेटी होगई बड़ी है।।
कितने स्नेह से सखियों ने मेहन्दी लगाई है,
कितने प्यार से भैया ने डोली सजाई है।
पिताजी आँसू छुपाये व्यस्त हुए है,
शायद दो पल के लिए अभ्यस्त हुए है।।
दुआओं से आज झोली घनी है,
मेरी बहन आज दुल्हन बनी है।।

सफ़र मीलों का-सा लगता है,
दुकड़िये से डोली तक।
दुनिया अब सिमट गई थी,
बाबुल से हमजोली तक।।
वो आँगन छोड़ चली है,
वो मधुबन छोड़ चली है।
वो बचपन छोड़ चली है,
वो बंधन छोड़ चली है।।
कुछ नए अरमान मन में संजोकर,
वो विदा हो चली है।
मेरी बहन आज दुल्हन बनी है।।

Wednesday, 21 September 2016

सलाह नही चेतावनी है!!

बातों का दौर अब खत्म हुआ,
ये बात तो सबने मानी है।
लाख नकारे चाहे कोई,
ये हरकत पाकिस्तानी है।।

शोक मेँ जिसके डूब गया,
वो जाबाज़ो की क़ुरबानी है।
बहुत किया बर्दाश्त अब तो,
सर से गुज़रा पानी है।।
नामर्दों की टोली का,
सरताज बन के बैठा है।
यहाँ शहीदों पर पूरा देश,
नाज़ करके बैठा है।।
बंदूकों की गोलियाँ,
छाती पर अपने झेली है।
ये भारत माँ के सपूत है,
जिन्होंने खून से होली खेली है।।
पीठ पीछे वार करे ये,
ये तेरी कारिस्तानी है।
लाख नकारे चाहे कोई,
ये हरकत पाकिस्तानी है।।

यहाँ देश के नेता अब भी,
कड़ी निंदा ही करते है।
और वहाँ सैकडों लोगों मेँ,
वो आतंकी ज़िंदा करते है।।
हमारे टुकड़ों पर पलने वाला,
हमपर ही घुर्राता है।
अब वक्त है दिखाने का कि,
कौन बाप कहलाता है।।
जितने चाहो उतने भेजो तुम,
इन बुज़दिल आतंकवादी को।
जिस दिन भी गुस्सा फ़ूट गया,
तुम रोओगे अपनी बर्बादी को।।
अरे अब भी वक्त है मान जा,
क्यों दोगला काम करते हो।
अपना तो तुम्हारा कुछ नही,
क्यों माँ के दूध को बदनाम करते हो।।
इस बार फ़ैसला करना है,
ये हर बच्चे बच्चे ने ठानी है।
लाख नकारे चाहे कोई,
ये हरकत पाकिस्तानी है।।

Saturday, 17 September 2016

आवारा लाश

कोई हक़दार नही, कोई दावेदार नही,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।
मेरे होने की वजह भी मेरे पास नही,
मेरी मौजूदगी का मुझे एहसास नही,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।।

कभी लांघा कभी कुचला तो,
कभी कोई मोटर कार निकल गई।
मैं वहीँ पड़ा रहा और,
दुनिया पार निकल गई।।
रूह कबकि निकल गई,
पर जान अभी बाकि थी।
अरमानों की अर्थी पर,
पहचान अभी बाकि थी।
मौसीक़ी मेरी ज़िन्दगी की
कोई और ही गा गया,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।
मेरी चाहत को कम्बख़्त कोई और ही भा गया,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।।

वक्त की घड़ी ख़ामोश है,
कभी कुछ नही कहती।
ये ज़िन्दगी की धारा है,
कभी उल्टी नही बहती।।
छोड़ बंजारे तू,
पछतावे से क्या मिलता है।
थाली पर सिर्फ सजते है,
फूल तो डाली पर ही खिलता है।।
उस फूल के रस को भी वो भँवरा ले गया,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।
और मुझे सिर्फ उड़ती ख़ुशबू दे गया,
ये ज़िन्दगी है एक आवारा लाश।।

Saturday, 27 August 2016

किस्मत

ज़िन्दगी भूल गई हमें,
उसे याद है कहानी पर।
दोष भी उन्हें क्या दें, जब
किस्मत लिखी है पानी पर।।

ख़ामोशी से हम जीते थे,
कोई ग़िला अब बचा नही।
सोचा तुझसे बेवफ़ाई करलूँ,
पर ये रस्ता तुम्हारा जँचा नही।।
फक्कड़ स्वभाव चंचल मन,
यारों की टोली हर मौसम सावन।
वो पहली मुलाक़ात के बाद,
सब बातें हो गई पुरानी पर।
ज़िन्दगी भूल गई हमें,
उसे याद है कहानी पर।
दोष भी उन्हें क्या दें, जब
किस्मत लिखी है पानी पर।।

मन पंछी बन बड़ा हुआ,
अब उड़ना इसने सीख लिया।
पानी मिल मिल नहर नदी बन,
अब मुड़ना इसने सीख लिया।।
बात ख़त्म हुई पन्नें पल्टे,
आख़िरकार मसले सारे सुल्टे।
अब भी मुझको हँसता देख,
उसे होती हैरानी पर।
ज़िन्दगी भूल गई हमें,
उसे याद है कहानी पर।
दोष भी उन्हें क्या दें, जब
किस्मत लिखी है पानी पर।।