Thursday, 28 May 2020

सोचा न था

सोचा न था,
कि हम तुम कभी ऐसे भी मिला करेंगे
इन दूरियों में पास होने की दुआ करेंगे,
सोचा न था।

तुम्हारे सिरहाने हमेशा आंखें खोली मैंने,
तुम्हारी मुस्कुराहट से उजाला होता था।
सुबह की वो पहली हमारी चाय से,
पूरे दिन आफिस में मेरा गुज़ारा होता था।

इस lockdown में हम दोनों चाहे कितना दूर सही,
मुस्कुराते हुए एक दूसरे को याद कर लेंगे।
वो प्यारभरी नोक झोंक हम दोनों,
फोन पर ही फिरसे एक बार कर लेंगे।

सोचा न था कि
एक दूसरे की बचकानी बातों पर
मन ही मन यूँ हँसा करेंगे।
इन दूरियों में भी पास होने कि दुआ करेंगे
सोचा न था।।

तेरे ख़त

कोई देख न ले ये हाल, मैं ये तेरे ख़त छुपा देता हूँ,
कोई झाँक रहा है खिड़की से, मैं ये चिराग़ बुझा देता हूँ।

रातभर अँधेरे से कई बाजियाँ खेली मैंने,
कौन हारा कौन जीता, मैं ये हिसाब सुबह देता हूँ।

तुमसे इश्क़ करने के लाखों बहाने दिए, सब बेसर रहे,
वो यूँ ही छोड़कर चले जाते हैं, जब मैं ये एक वजह देता हूँ।

साँसे जबतक हैं मैं साँस नही ले पाउँगा,
तुम्हें याद रखने की ख़ुद को मैं ये सज़ा देता हूँ।

अभी भी बाकि है उस बाग़ में कुछ सूखे फूल,
आज तुम्हारे खतों में रखकर मैं ये जला देता हूँ।।

Saturday, 9 May 2020

आग

अच्छी बुरी सब आदतें चली गईं बस तेरी जुदाई नही जाती,
ख़ुद में से तो मैं भी चला गया बस तेरी रुसवाई नही जाती।

कैसे कहें तुझसे कि क्यों हैं परेशां,
बोल के तो हर बात बताई नही जाती।

एक दौर था जब ये होंठ खामोश रहते थे,
अब तो चीख़ भी किसी को सुनाई नही जाती।

होंठो की बातें अक्सर आँखे कर लेती थी,
अब तो लफ़्ज़ों में भी बात समझाई नही जाती।

मेरे नाख़ुदा हो तुम लो पतवार संभालो,
यूँ किनारे से फ़िक्र जताई नही जाती।

दिल की हर चीज़ टूट गई उनके देखने से,
अब और मुझसे दिल्लगी दिखाई नही जाती।

मेरे अल्फ़ाज़ ने बुझा दी अज़ीयत कई दिलों की,
बस अपने ही दिल की आग बुझाई नही जाती।।

हम तो हैं

मरता छोड़ गया था कोई ग़म तो है,
साँसे तसल्ली देती हैं अभी हम तो हैं,

आता नही था जिसके बिना दो पल जीना
धड़कनें ये कहती हैं अभी हम तो हैं।

जिनकी बाँहों में सर रखकर ही सो पाते थे हम,
अब तकिये सर सहलाते हैं अभी हम तो हैं।

अब किसकी आँखों में देखकर डूबा करेंगे हम,
सितारे सब कहते हैं अभी हम तो हैं।।

Monday, 10 February 2020

बस रह गए

ज़ख्म बेहतर हुए बस निशान रह गए,
मोहब्बत देख के वो हमारी बस हैरान रह गए।

जितना दुखी इन ज़माने वालों ने किया,
उतनी ऊँची मेरी हँसी देखकर बस परेशान रह गए।

सड़कों पर आजकल देखी जाती है ज़िन्दगी,
जो घर हुआ करते थे अब बस मकान रह गए।

एक बस तुम्ही हो जिसे ज़हन से जाने नही दिया,
बाकि जो थे बस मेहमान रह गए।

पिताजी ने कहा था सब सीख लो हिसाब किताब,
देखो आज मेरे हिस्से में बस नुकसान रह गए।

सुकून, मोहबत वो अपने ये उम्रें सब ले गई हमारी,
आँखों में पले थे जो सपने बस वो जवान रह गए।।

Friday, 27 December 2019

ज़िन्दगी की कहानी

ज़िन्दगी हर रोज़ एक नया कदम लेती है,
हर सुबह उठके एक नया जनम लेती है।
ये छोटी सी सच्चाई तुम्हें बतानी है,
ये ज़िन्दगी तुम्हारी अपनी  ही कहानी है।

हर साल कुछ पन्ने जुड़ जाते हैं,
कुछ कहानियाँ तो कुछ यादों में जुड़ जाते हैं।
कुछ बदल जाते हैं कुछ मोड़ देते हैं,
हर किस्सा तुम्हें कहानी से जोड़ देते हैं।

हर जन्मदिन पर तुम कुछ ठान सकते हो,
हर सपने तुम्हारे अपने हैं ये मान सकते हो।
उठो, चलो, अभी जान बाकि है,
ज़िन्दगी की कहानी में अभी अंजाम बाकि है।।

Monday, 1 July 2019

मेरा गाँव

ओस को अपनी कलम में भरकर
मैं फूलों पर कुछ लिखता हूँ,
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।

चिड़िया की चहचहाहट को
पत्तों की सरसराहट को,
उस घास की नरमाहट को
एक अर्थ प्रदान करता हूँ।
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।

घोंसले से उड़े परिंदे
बादल से हाथ मिलाते हैं,
दूर किसी बिदेस से कोई
दाना चुगने आते हैं।
मुँह धोती गुलशन ताल पर
और कौवे संग नहाते है,
अपने-अपने गाँव के किस्से
सब आपस में सुनाते हैं।
ये मेरे गांव की सुबह थी,
मैं अब भी इस सुबह में दिखता हूँ।
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।।