Friday, 9 February 2018

अधूरी मोहब्बत

जब भी मैं और मेरा सुकून बातें करते हैं,
तुम्हारी यादों से जब दो मुलाक़ातें करते हैं।
कभी हँसते है कभी रोते हैं तुम्हारा नाम लेकर,
तो कभी उस ख़ुदा से फ़रियादें करते हैं।।

उन जी चुके लम्हों को फिर जीने का मन करता है,
उन टपकते लफ़्ज़ों को फिर पीने का मन करता है।
कुछ तो था उस वक्त में जिसे मैं भूल नही पाता हूँ,
उन बिखरे हुए रिश्तों को फिर सीने का मन करता है।।

क्यों मैं ही टूटता हूँ हर बार हम दोनों में,
क्यों तुम ही रूठती हो हर बार हम दोनों में।
क्यों मेरे हर ज़िक्र में सिर्फ़ तुम्हारा ही ज़िक्र रहता है,
क्यों मेरे ही आँखों से आँसू का दरिया बहता है।।

उन सपनों के हालात बदलते देखे है,
तुम्हारी आँखों से जज़्बात बदलते देखे है।
अपनी अना को तुम्हारे आग़ोश में तोड़ा कई बार हमने है,
अपने क़दमो को तुम्हारी राहों में मोड़ा कई बार हमने है।।

बात अब बस इतनी सिमट कर रह गई है,
मेरी मोहब्बत मुझसे लिपट कर रह गई है।
कोई ग़म नही कोई शिकवा नही कोई मलाल नही है,
मेरी अधूरी मोहब्बत से अब कोई सवाल नही है।।

Sunday, 7 January 2018

पत्र

मानता हूं कि तुम दुनिया की
सबसे अच्छी लड़की नहीं हो,
मगर तुमसे अच्छी बहन
और कोई हो नहीं सकती थी।

मानता हूं कि तुम समझती हो कि
तुम बहुत समझदार हो गई हो,
मगर मेरे लिए तुम वहीं
नादान लड़की हो।

मानता हूं कि तुम्हे लगता है कि
तुम अब बड़ी हो गई हो,
मगर मुझे तुम अब भी वही
आंगन में उड़ती नन्ही तितली लगती हो।

ऐसा नहीं है कि मुझे विश्वास नहीं
तुम्हारी आकांक्षाओं का मुझे आभास नहीं,
हर साल एक कदम तुम बढ़ ही रही हो
दुनिया की हर बात पढ़ ही रही हो।

मगर वो क्या है ना तुम चाहे
कितनी बड़ी हो जाओ,
मगर मेरे लिए तुम वहीं
नन्ही परी रहोगी।

बस आज इतनी ही बात कहता हूं
बाकि तुम पर निर्भर रहता हूं,
हंसो गाओ मुस्कुराओ
आज तुम्हारा दिन है।।

Thursday, 5 October 2017

मिलन

एक ज़ोरदार गर्जन के साथ आसमान में बिजली कौंधी है,
मिलन की आस लिए धरती फिरसे मचलने लगी है।
एक अरसे बाद अपनी प्रियसी से मिलने
मेघ आयें हैँ।।

भागी भागी बयार आई है,
संग अपने, पिया की आहाट लाई है।
पंछी सब ख़ुशी के मारे झूम रहे हैं,
पेड़ सभी आवभगत में घूम रहे है।
थाल आरती का लिए मोर आएं हैं,
एक अरसे बाद अपनी प्रियसी से मिलने
मेघ आयें हैँ।।

मेमने, बछिया हिरनी सब मैदान में बडीं  है,
गाँव की किशोरियाँ जैसे मुंडेरी पर खड़ीं है।
मारे खुशी के गौरैया चारों ओर भगी है,
पाहुन की झलक पाने की सब में होड़ लगी है।
कोयल झूम के सबको मंगल गीत सुनाये है,
एक अरसे बाद अपनी प्रियसी से मिलने मेघ आये हैं।।

लज्जाती हुई प्रियसी दुकड़िये में आ जाती है,
अंततः काली घटा अम्बर में छा जाती है।
बड़ी देर भयी पिया अबके तुमको आने में,
दो पहर और शेष बचे थे हमरे मुरझाने में।
कान पकड़े, प्रियसी को देखो मेघ मनाये है,
एक अरसे बाद अपनी प्रियसी से मिलने मेघ आये है।।

खोले किवाड़ प्रियसी अपने पिया के स्वागत में,
जैसे धरती बाँहे खोल खड़ी है भाद्रपद में।
बाँध प्रेम बूँद की गठरी में मेघ बरसाए है,
मंत्रमुग्ध पिया मन ही में मुस्काये है।।
दिन हो गए पूरे विरह के,
सब दुःख अंतर से उड़ जाये है।
आई मिलन की बेला देखो
धरती कैसे शरमाये है।
एक ज़ोरदार गर्जन के साथ आसमान में बिजली कौंधी है,
एक अरसे बाद अपनी प्रियसी से मिलने
मेघ आयें हैँ।।

Saturday, 19 August 2017

तरस

ये कैसा तरस मैं ख़ुद पर खाने जा रहा हूँ,
अपनी मौत की ख़बर मैं ख़ुद सुनाने जा रहा हूँ।।

दो आँखे भी नहीं कमा पाया मैं ज़िन्दगी भर,
अपने जनाज़े में मैं आँसू बहाने जा रहा हूँ।

बूँद बनकर जिया तो सिर्फ टपकता ही रहा,
आज बादल बनकर आसमान में छाने जा रहा हूँ।

सब कुछ ख़ो दिया इस ज़िन्दगी के सफ़र में,
आज उन सभी रिश्तों को पाने जा रहा हूँ।।

लफ़्ज़ों की मिठास से अनजान ही रहा हूँ मैं,
आज मोहब्बत की धुन को गाने जा रहा हूँ।।

जिस ज़िन्दगी को इस ज़िन्दगी में मैं जी नहीं पाया,
उस ज़िन्दगी को मैं एक और दफ़ा लाने जा रहा हूँ।।

ये कैसा तरस में ख़ुद पर खाने जा रहा हूँ,
अपनी मौत की ख़बर मैं ख़ुद सुनाने जा रहा हूँ।।

Thursday, 20 July 2017

याद

तुम्हारे बदन पर मेरी उँगलियों की लिखावट याद आती है,
तुम्हारे होठों पर सुर्ख़ लाली की सजावट याद आती है।।

वो नज़दीकियाँ इन आँखों में आज भी उतनी जवान है,
उन नज़दीकियों में तेरी साँसों की गरमाहट याद आती है।।

शायद देर से आने की आदत वही बरक़रार है अभी तक,
आज उन शामों में तेरी झुंझलाहट याद आती है।।

यहाँ बेवजह नाख़ुश से रहते है सभी नजाने क्यों,
यहाँ आकर मुझे तेरे गुस्से की बनावट याद आती है।।

कौन जानता है वो कुचला कौन गया, क्या फ़र्क़ पड़ता है,
इन ग़ैरों की मतलबी दुनिया में तेरी घबराहट याद आती है।।

कुछ बात थी तुम्हारे छूने में,एक अलग सा एहसास था,
अब इन तनहा रातों में वो सरसराहट याद आती है।।

मालुम नहीं कुछ बचा पाया हूँ क्या,
मुझे अब मेरी आहाट याद आती है।।

Wednesday, 19 July 2017

तुम

रुतबा इज़्ज़त, प्यार मोहब्बत,
तुम्हें सब मानते हैं।
अब तक तो तुम सब कुछ थी मेरी,
चलो आज से तुम्हे रब मानते हैं।।

माना कि तुम्हे पाने के लिए
कुछ किया नहीं हमने,
मगर इबादतों से हम कभी उठे नहीं
ये बात यहाँ सब जानते है।।

फ़क़त चाँद के पास ही चांदनी है
इस बात से तुम्हे इंकार कहाँ,
मगर सितम इस बात का है,
मगर ये बात सितारे कब मानते है।।

इश्क़ के दौर में कहानियाँ बहुत है,
कौन-सी हक़ीक़त है कौन जनता है।
हम हाल-ए-दिल बयाँ करेंगे जब,
मोहब्बत वो हमारी तब मानते हैं।।

यक़ीन कहीं न कहीं उन्हें भी है अपने दिल में,
पूरी शिद्दत से निभाते हैं हम जब ठानते है।।

अब तक तो तुम सब कुछ थी मेरी,
चलो आज से तुम्हे रब मानते हैं।।

Tuesday, 9 May 2017

कवि

मैं एक कवि हूँ,
ज़िन्दगी के पन्नों पर
वक्त की कलम से,
मैं कुछ लिखता हूँ।
अपनी भावनाओं को,
उनकी आँखों से देखता हूँ,
उनके आँसू के रंग समेट
अपने भावों में लिखता हूँ।
मैं एक कवि हूँ,
जाने क्या करता हूँ।।

बुलबुलों से हल्के, पत्थर से भारी,
जैसे ख़्याल आते है।
ये भावना ये चेतना जाने क्या
बवाल मचाते है।।
अनगिनत से लगते है
ये बेहिसाब ख़्याल,
नई कहानी लिख जाते है
करके एक सवाल।।
मैं कलाकार हूँ खूंखार नही,
पूरी नफरत भी नही करता
और अधूरा प्यार भी।।
तुम मेरे कोमल बुलबुलों की तरह हो,
जो उड़ा ले जाते है मुझे ख़्यालों की दुनिया में,
भावनाओं का नया गीत लिखने को।

और फिर छोड़ जाते है मुझे नए बुलबुले की तलाश में
एक नए गीत की रचना करने को।
मैं एक कवि हूँ,
जाने क्या करता हूँ,
जाने क्या लिखता हूँ।।