Udte Khyal
Friday, 31 May 2019
जब तुमने देखा
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जिस सम्त को नज़र उठाकर देखा, इस दर्द की दवा को आज़माकर देखा। बेअसर हो गए हैं बेहिसाब दर्द के, हर नुस्ख़ा उलट-पलट घुमाकर देखा। फिर लगा शायद ...
Tuesday, 23 April 2019
मेरी बहन
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यूँ तो रिश्तों की कोई गिनती नही रिश्तेदारी की दुनिया में, पर हमारे रिश्ते की बात कुछ और है। अपनों की-सी बात अपनों में ही मिलती नही समझदा...
Friday, 5 October 2018
एक बाग़ है
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आहिस्ता आहिस्ता रिस रहा हूँ मैं अपनी हथेली की क़ैद से, रेत बन चुके है सब ख़्याल मेरे और मैं उन्हें अब रिहा कर रहा हूँ। जब तक थे यहाँ खूबसू...
Friday, 21 September 2018
शाम
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और एक ऐसी ही रंगीन शाम थी लालिमा से आसमान भरा हुआ था, हल्के से चाँद ऊफूक पर दस्तक दे चुका था और हम तुम बाँहे थामे टहल रहे थे, तुम मेरी ए...
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Friday, 14 September 2018
छुट्टी का आखिरी दिन
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और मैं उन्हें पलट कर देख नही पाया ट्रैन की आख़िरी सिटी पर भी नही देखा, जानता था कि पलट कर देखा तो अपने आँसू रोक नही पाउँगा, पापा ये जानते...
Saturday, 8 September 2018
आँगन की धूप
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सुनहरी धूप खिली है मेरे आँगन में आज बहुत दिनों के बाद, सोच रहा हूँ सुखा लूँ रूह को तार पे। बहुत दिनों से बे-ज़ार ठंडे कोने में पड़ी हुई ह...
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Thursday, 9 August 2018
ज़िन्दगी
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इम्तहानों का क्या है दे देंगे, दिल के अरमानों का क्या है दे देंगे। तुम्हारी खुशी के लिए तुम्हें भुलाना ही तो है, इन फ़रमानों का क्या है ...
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