Udte Khyal

Wednesday, 6 May 2015

तजुर्बा

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सड़क किनारे बैठा मैं, दुनियां संवारता चला। मौत का सामान देकर, मैं ज़िंदगी गुज़ारता चला। सैंकड़ों सावन गुज़र गए, हर बारिश में मैं डंटा रहा।...

माँ

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माँ मुझे मत भेज परदेस, डर लगता है।  तेरे आँचल से दूर जाने में, मुझे डर लगता है।  तेरा वो खाना लेके पीछे दौड़ना, मेरा वो तेरे साथ ...

उड़ना चाहता हूँ मैं

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उड़ना चाहता हूँ मैं, पंछियों की तरह, पंछियों के साथ, उड़ना चाहता हूँ मैं। आसमान में गोते लगाती, हवा को चीरती हुई, चीलों के साथ, उड़ना ...

शिक्षक

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                             अंधेरों में भटकते बच्चों के लिए, जो ज्ञान की लॉ जलाते हैं। उलझे हुए रास्तों में से, सही राह दिखाते है। ब...
Friday, 24 April 2015

MAUSAM

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                                                                                                                                        ...
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Contributors

  • Unknown
  • Vikas Goswami
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