Saturday, 9 May 2020

आग

अच्छी बुरी सब आदतें चली गईं बस तेरी जुदाई नही जाती,
ख़ुद में से तो मैं भी चला गया बस तेरी रुसवाई नही जाती।

कैसे कहें तुझसे कि क्यों हैं परेशां,
बोल के तो हर बात बताई नही जाती।

एक दौर था जब ये होंठ खामोश रहते थे,
अब तो चीख़ भी किसी को सुनाई नही जाती।

होंठो की बातें अक्सर आँखे कर लेती थी,
अब तो लफ़्ज़ों में भी बात समझाई नही जाती।

मेरे नाख़ुदा हो तुम लो पतवार संभालो,
यूँ किनारे से फ़िक्र जताई नही जाती।

दिल की हर चीज़ टूट गई उनके देखने से,
अब और मुझसे दिल्लगी दिखाई नही जाती।

मेरे अल्फ़ाज़ ने बुझा दी अज़ीयत कई दिलों की,
बस अपने ही दिल की आग बुझाई नही जाती।।

हम तो हैं

मरता छोड़ गया था कोई ग़म तो है,
साँसे तसल्ली देती हैं अभी हम तो हैं,

आता नही था जिसके बिना दो पल जीना
धड़कनें ये कहती हैं अभी हम तो हैं।

जिनकी बाँहों में सर रखकर ही सो पाते थे हम,
अब तकिये सर सहलाते हैं अभी हम तो हैं।

अब किसकी आँखों में देखकर डूबा करेंगे हम,
सितारे सब कहते हैं अभी हम तो हैं।।

Monday, 10 February 2020

बस रह गए

ज़ख्म बेहतर हुए बस निशान रह गए,
मोहब्बत देख के वो हमारी बस हैरान रह गए।

जितना दुखी इन ज़माने वालों ने किया,
उतनी ऊँची मेरी हँसी देखकर बस परेशान रह गए।

सड़कों पर आजकल देखी जाती है ज़िन्दगी,
जो घर हुआ करते थे अब बस मकान रह गए।

एक बस तुम्ही हो जिसे ज़हन से जाने नही दिया,
बाकि जो थे बस मेहमान रह गए।

पिताजी ने कहा था सब सीख लो हिसाब किताब,
देखो आज मेरे हिस्से में बस नुकसान रह गए।

सुकून, मोहबत वो अपने ये उम्रें सब ले गई हमारी,
आँखों में पले थे जो सपने बस वो जवान रह गए।।

Friday, 27 December 2019

ज़िन्दगी की कहानी

ज़िन्दगी हर रोज़ एक नया कदम लेती है,
हर सुबह उठके एक नया जनम लेती है।
ये छोटी सी सच्चाई तुम्हें बतानी है,
ये ज़िन्दगी तुम्हारी अपनी  ही कहानी है।

हर साल कुछ पन्ने जुड़ जाते हैं,
कुछ कहानियाँ तो कुछ यादों में जुड़ जाते हैं।
कुछ बदल जाते हैं कुछ मोड़ देते हैं,
हर किस्सा तुम्हें कहानी से जोड़ देते हैं।

हर जन्मदिन पर तुम कुछ ठान सकते हो,
हर सपने तुम्हारे अपने हैं ये मान सकते हो।
उठो, चलो, अभी जान बाकि है,
ज़िन्दगी की कहानी में अभी अंजाम बाकि है।।

Monday, 1 July 2019

मेरा गाँव

ओस को अपनी कलम में भरकर
मैं फूलों पर कुछ लिखता हूँ,
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।

चिड़िया की चहचहाहट को
पत्तों की सरसराहट को,
उस घास की नरमाहट को
एक अर्थ प्रदान करता हूँ।
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।

घोंसले से उड़े परिंदे
बादल से हाथ मिलाते हैं,
दूर किसी बिदेस से कोई
दाना चुगने आते हैं।
मुँह धोती गुलशन ताल पर
और कौवे संग नहाते है,
अपने-अपने गाँव के किस्से
सब आपस में सुनाते हैं।
ये मेरे गांव की सुबह थी,
मैं अब भी इस सुबह में दिखता हूँ।
एक नई सुबह का गीत कोई
उस मीठी धूप पर लिखता हूँ।।

Sunday, 30 June 2019

अनकही बात

ये जो आँखों में नमी है
ये और कुछ नही बस वो
बची हुई मोहब्बत है जो मैं कभी
तुमसे बेपनाह करता था,
शायद किसी को ये पानी लग सकता है,
और तुम भी अगर ये मानो
तो मुझे कोई हैरानी नही होगी।
हाँ बस ये अफ़सोस ज़रूर होगा कि तुम भी
इसे पानी ही समझती हो।

तुम्हारी गलती नही है
तुमने तो बस इन आँखों में
हमेशा शरारत ही देखी है,
कभी उसमे छिपी मोहब्बत नही देखी।
तुम्हे बस एक  पागल लड़का दिखा
जो हर वक्त तुम्हे हँसाने के लिए
क्या कुछ कर जाता है।
क्या तुम सच में उसे पागल समझती थी
या तुम्हे कभी उन आंखों में डूबता हुआ
प्यार नही दिखा।

क्या तुम्हे कभी नही दिखा कि
थोड़ी सी तवज्जो के लिए वो
कितनी जान छिडकता था।
क्या तुम्हे कभी नही दिखा कि
जब तुम उस रात किसी और के साथ में थी
वो रात वो रो क्यों रहा था,
और जब सुबह 4 बजे तुम रोते हुए उसे
फोन करती हो वो सब भूल कर
तुम्हे क्यों हंसाने लगता था।
क्या तुम्हे सच में लगता था कि
वो प्यार नहीं करता था।।

Friday, 31 May 2019

जब तुमने देखा

जिस सम्त को नज़र उठाकर देखा,
इस दर्द की दवा को आज़माकर देखा।

बेअसर हो गए हैं बेहिसाब दर्द के,
हर नुस्ख़ा उलट-पलट घुमाकर देखा।

फिर लगा शायद ये ख़ुर्शीद की ख़ता है,
चलो आज रात इसे भी बुझाकर देखा।

शायद दूसरे मेहबूब की गली में शफ़ा मिले,
तो हर गली में मेहबूब बनाकर देखा।

जब कहीं सुनवाई नही तो वो सुनता है,
आख़िर में ख़ुदा से दामन फैलाकर देखा।

अब और नही जिया जाता है मियाँ,
हमने ख़ुद में से कहीं जाकर देखा।

जब सब घूमकर वापस तेरे दीदार को आये,
तब कहीं समझे जब तुमने शर्माकर देखा।।